अंबाला से 650 किलोमीटर दूर डिलौलिया गांव पहुंचा मासूम शिवांश का निर्जीव शरीर। मां की बताई कहानी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलट दी। चेहरे से लेकर फेफड़े तक पर चोटों के निशान, मौत मारपीट से होने की आशंका।
डिलौलिया। रविवार की रात डिलौलिया गांव का माहौल सामान्य था। लेकिन तभी गांव के एक घर का दरवाज़ा धीरे से खुला और अंदर कदम रखा रागिनी ने—गोद में अपने दो साल के बेटे शिवांश का ठंडा, निर्जीव शरीर लेकर। जैसे ही परिजनों की नज़र पड़ी, चीखें घर और आंगन में गूंज उठीं। मां की बाहों में निष्प्राण पड़े मासूम शिवांश की तस्वीर ने पिता राहुल से लेकर पूरे परिवार की दुनिया हिला दी।
परिवार बेसुध था… लेकिन असली सदमा तो तब लगा जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट ने न सिर्फ रागिनी की बताई कहानी को झुटला दिया, बल्कि मौत के पीछे की पूरी कहानी पर गहरे सवाल उठा दिए।
“रो रहा था, सो नहीं रहा था… दो तमाचे मारे थे।”
दीपावली से पहले मायके गई रागिनी बाद में ननद के जेठ प्रांशू के साथ अंबाला चली गई थी। रविवार रात वह अचानक बस से गांव लौटी—लेकिन गोद में चलने-फिरने वाला नहीं, बल्कि अपने बेटे का शव लिए हुए।
चाचा रोहित बताते हैं, “पूछा तो बोली कि बच्चा रात में रो रहा था… सो नहीं रहा था… गुस्से में एक-दो तमाचे मार दिए। फिर सुला दिया। सुबह देखा तो मरा पड़ा था।” लेकिन 2 साल के बच्चे के चेहरे, गर्दन और पेट पर गहरी चोटों के निशान देख पिता राहुल समझ गए कि बात इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। उन्होंने तुरंत पुलिस से पोस्टमार्टम की मांग की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदल दिया पूरा मामला
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि “फेफड़े का इस तरह फटना न गिरने से हो सकता है और न हल्के थप्पड़ों से। यह किसी भारी प्रहार या जोरदार मारपीट का परिणाम है।” डिलौलिया गांव इस वक्त सदमे में है। एक मासूम का जाना ही दर्द था, लेकिन उसके साथ हुई हिंसा की संभावना गांव में डर और गुस्से का माहौल है।
