आजम खां ने मायावती को बताया ‘बड़े जनसमूह की नायक’, सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म

The Noir Script Digital Desk: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और संस्थापक सदस्यों में से एक आजम खां इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बरेली जेल में करीब 23 महीने बिताने के बाद रिहा हुए आजम खां लगातार राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं।

हालांकि उन्होंने बसपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया है, लेकिन अब उनके बयान सियासी तापमान को और बढ़ा रहे हैं। शुक्रवार को आजम खां ने बसपा प्रमुख मायावती की जमकर सराहना करते हुए उन्हें “बड़े जनसमूह की नायक” बताया।

 मायावती की तारीफ, सियासी संकेतों पर चर्चा

“मेरी नजर में मायावती की बहुत अहमियत है। वो बड़े जनसमूह की नायक हैं। न सिर्फ मैं बल्कि पूरा देश उनका सम्मान करता है। चाहे वो मुख्यमंत्री रहीं हों या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम उनकी इज्जत भी करते हैं और एहतराम भी।”

आजम खां

उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो मायावती से मिल भी सकते हैं — और यह मुलाकात राजनीतिक हो यह जरूरी नहीं, यह इंसानी या सामाजिक कारणों से भी हो सकती है।

 मायावती ने दी सफाई, आजम ने कहा — “शुक्रिया

दरअसल, लखनऊ में गुरुवार को हुई बसपा की रैली में मायावती ने बिना नाम लिए कहा था कि अगर उन्हें किसी से मिलना होता तो वो “खुलेआम मिलती हैं”। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को अफवाहों से बचने की नसीहत दी थी।

इस पर आजम खां ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा,“मैं उनका शुक्रिया अदा करूंगा। उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही जिससे मेरे दिल को ठेस पहुंचे। बहुत शुक्रिया।”

 कांशीराम से पुराने रिश्तों का जिक्र

आजम खां ने मायावती के साथ अपने पुराने रिश्तों को याद करते हुए बताया, “बसपा संस्थापक कांशीराम साहब से मेरा अच्छा रिश्ता रहा है। वो कई बार फजर की नमाज के समय मुझसे मिलने आया करते थे। मायावती भी रामपुर में मेरी मेहमान रह चुकी हैं। उनका और उनके परिवार का मैं बहुत एहतराम करता हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर मायावती को किसी खबर से ठेस पहुंची हो, तो उन्हें इसका अफसोस है। “उनकी अहमियत मेरे दिल में कभी कम नहीं हुई,” आजम ने कहा।

सियासी मायने गहराते जा रहे

आजम खां और मायावती के बीच यह “नरमी भरा संवाद” उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई संभावनाओं और समीकरणों के संकेत माना जा रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव हाल ही में आजम खां से मिलने रामपुर गए थे, वहीं बसपा प्रमुख का यह अप्रत्यक्ष संवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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